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पलकों की दहलीज़ पे चमका एक सितारा था
پلکوں کی دہلیز پہ چمکا ایک ستارا تھا
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ये गर्द-बाद-ए-तमन्ना में घूमते हुए दिन
یہ گرد باد تمنا میں گھومتے ہوئے دن
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दो दिन से कुछ बनी थी सो फिर शब बिगड़ गई
دو دن سے کچھ بنی تھی سو پھر شب بگڑ گئی
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उस के कूचे से जो उठ अहल-ए-वफ़ा जाते हैं
اس کے کوچے سے جو اٹھ اہل وفا جاتے ہیں
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ऐ गुल नौ दमीदा के मानिंद
اے گل نو دمیدہ کے مانند
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