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ऐ अब्र-ए-तर तू और किसी सिम्त को बरस
मीर तक़ी मीर द्वारा
اے ابر تر تو اور کسی سمت کو برس
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फिर मुझे दीदा-ए-तर याद आया
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
پھر مجھے دیدۂ تر یاد آیا
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तेग़-ए-सितम से उस की मिरा सर जुदा हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
تیغ ستم سے اس کی مرا سر جدا ہوا
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कब से नज़र लगी थी दरवाज़-ए-हरम से
मीर तक़ी मीर द्वारा
کب سے نظر لگی تھی دروازۂ حرم سے
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ख़ुश न आई तुम्हारी चाल हमें
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوش نہ آئی تمہاری چال ہمیں
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बे रो-ए-ओ-ज़ुल्फ़-ए-यार है रोने से काम याँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
بے روے و زلف یار ہے رونے سے کام یاں
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हम तेरा हिज्र मनाने के लिए निकले हैं
जौन एलिया द्वारा
ہم ترا ہجر منانے کے لیے نکلے ہیں
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किस शाम से उठा था मिरे दिल में दर्द सा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کس شام سے اٹھا تھا مرے دل میں درد سا
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जब ब-तक़रीब-ए-सफ़र यार ने महमिल बाँधा
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
جب بہ تقریب سفر یار نے محمل باندھا
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न इक याक़ूब रोया उस अलम में
मीर तक़ी मीर द्वारा
نہ اک یعقوب رویا اس الم میں
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बिसात-ए-अज्ज़ में था एक दिल यक क़तरा-ए-ख़ूँ वो भी
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
بساط عجز میں تھا ایک دل یک قطرہ خوں وہ بھی
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जाना कि शुग़्ल रखते हो तीर-ओ-कमाँ से तुम
मीर तक़ी मीर द्वारा
جانا کہ شغل رکھتے ہو تیر و کماں سے تم
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