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पलकों की दहलीज़ पे चमका एक सितारा था
Amjad Islam Amjad द्वारा
پلکوں کی دہلیز پہ چمکا ایک ستارا تھا
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ये गर्द-बाद-ए-तमन्ना में घूमते हुए दिन
Amjad Islam Amjad द्वारा
یہ گرد باد تمنا میں گھومتے ہوئے دن
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दो दिन से कुछ बनी थी सो फिर शब बिगड़ गई
मीर तक़ी मीर द्वारा
دو دن سے کچھ بنی تھی سو پھر شب بگڑ گئی
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उस के कूचे से जो उठ अहल-ए-वफ़ा जाते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس کے کوچے سے جو اٹھ اہل وفا جاتے ہیں
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ऐ गुल नौ दमीदा के मानिंद
मीर तक़ी मीर द्वारा
اے گل نو دمیدہ کے مانند
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मेहर की तुझ से तवक़्क़ो थी सितम-गर निकला
मीर तक़ी मीर द्वारा
مہر کی تجھ سے توقع تھی ستم گر نکلا
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कहते हैं बहार आई गुल फूल निकलते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
کہتے ہیں بہار آئی گل پھول نکلتے ہیں
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बे कसाना जी गिरफ़्तारी से शिवन में रहा
मीर तक़ी मीर द्वारा
بے کسانہ جی گرفتاری سے شیون میں رہا
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दामान-ए-कोह में जो मैं ढाढ़ मार रोया
मीर तक़ी मीर द्वारा
دامان کوہ میں جو میں ڈاڑھ مار رویا
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क्या दिन थे वे कि याँ भी दिल आरमीदा था
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا دن تھے وے کہ یاں بھی دل آرمیدہ تھا
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नाम ही क्या निशाँ ही क्या ख़्वाब-ओ-ख़याल हो गए
जौन एलिया द्वारा
نام ہی کیا نشاں ہی کیا خواب و خیال ہو گئے
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हम कहाँ और तुम कहाँ जानाँ
जौन एलिया द्वारा
ہم کہاں اور تم کہاں جاناں
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गुज़राँ हैं गुज़रते रहते हैं
जौन एलिया द्वारा
گزراں ہیں گزرتے رہتے ہیں
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हुक्म-ए-सैय्याद है ता ख़त्म-ए-तमाशाए-बहार
قمر جلالوی द्वारा
حکم صیاد ہے تا ختم تماشائے بہار
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यूँ तो पहले भी हुए उस से कई बार जुदा
अहमद फ़राज़ द्वारा
یوں تو پہلے بھی ہوئے اس سے کئی بار جدا
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था अबस तर्क-ए-ताल्लुक़ का इरादा यूँ भी
अहमद फ़राज़ द्वारा
تھا عبث ترک تعلق کا ارادہ یوں بھی
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दिल बदन का शरीक-ए-हाल कहाँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
دل بدن کا شریک حال کہاں
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तेरी गली में मैं न चलूँ और सबा चले
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
تیری گلی میں میں نہ چلوں اور صبا چلے
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पैग़ाम ग़म जिगर का गुलज़ार तक न पहुँचा
मीर तक़ी मीर द्वारा
پیغام غم جگر کا گلزار تک نہ پہنچا
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न किसी से पास मेरे यार का आना गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
نا کسی سے پاس میرے یار کا آنا گیا
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