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अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ
اب کے تجدید وفا کا نہیں امکاں جاناں
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इश्क़ हमारे ख़याल पड़ा है
عشق ہمارے خیال پڑا ہے
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हटी ज़ुल्फ़ उनके चेहरे से मगर आहिस्ता आहिस्ता
ہٹی زلف ان کے چہرے سے مگر آہستہ آہستہ
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तेरे क़रीब आ के बड़ी उलझनों में हूँ
تیرے قریب آ کے بڑی الجھنوں میں ہوں
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हर तमाशाई फ़क़त साहिल से मंज़र देखता
ہر تماشائی فقط ساحل سے منظر دیکھتا
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