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हिज्रां

सभी 8अशआर 0ग़ज़ल 8
ग़ज़ल8
अब के तजदीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जानाँ
اب کے تجدید وفا کا نہیں امکاں جاناں
इश्क़ हमारे ख़याल पड़ा है
عشق ہمارے خیال پڑا ہے
हटी ज़ुल्फ़ उनके चेहरे से मगर आहिस्ता आहिस्ता
ہٹی زلف ان کے چہرے سے مگر آہستہ آہستہ
तेरे क़रीब आ के बड़ी उलझनों में हूँ
تیرے قریب آ کے بڑی الجھنوں میں ہوں
हर तमाशाई फ़क़त साहिल से मंज़र देखता
ہر تماشائی فقط ساحل سے منظر دیکھتا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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