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क़ामत को तेरे सर्व-ए-सनोबर नहीं कहा
अहमद फ़राज़ द्वारा
قامت کو تیرے سرو صنوبر نہیں کہا
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इक बूँद थी लहू की सर-ए-दार तो गिरी
अहमद फ़राज़ द्वारा
اک بوند تھی لہو کی سر دار تو گری
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