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क्या कहिए कि ख़ूबां ने अब हम में है क्या रखा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہیے کہ خوباں نے اب ہم میں ہے کیا رکھا
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जाँ गुदाज़ इतनी कहाँ आवाज़ ऊद-ओ-चंग है
मीर तक़ी मीर द्वारा
جاں گداز اتنی کہاں آواز عود و چنگ ہے
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गुल शर्म से बह जाएगा गुलशन में हो कर आब सा
मीर तक़ी मीर द्वारा
گل شرم سے بہہ جائے گا گلشن میں ہو کر آب سا
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वाँ वो तो घर से अपने पी कर शराब निकला
मीर तक़ी मीर द्वारा
واں وہ تو گھر سے اپنے پی کر شراب نکلا
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जिस जा नसीम शाना-कश-ए-ज़ुल्फ़-ए-यार है
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
جس جا نسیم شانہ کش زلف یار ہے
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इक हुनर था कमाल था क्या था
परवीन शाकिर द्वारा
اک ہنر تھا کمال تھا کیا تھا
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रंग ख़ुशबू में अगर हल हो जाए
परवीन शाकिर द्वारा
رنگ خوش بو میں اگر حل ہو جائے
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रात से आँसू मरी आँखों में फिर आने लगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
رات سے آنسو مری آنکھوں میں پھر آنے لگا
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ख़ुश क़दाँ जब सवार होते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوش قداں جب سوار ہوتے ہیں
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मशहूर चमन में तिरी गुल पैरहनी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
مشہور چمن میں تری گل پیرہنی ہے
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गर्म हैं शोर से तुझ हुस्न के बाज़ार कई
मीर तक़ी मीर द्वारा
گرم ہیں شور سے تجھ حسن کے بازار کئی
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गुज़र जान से और डर कुछ नहीं
मीर तक़ी मीर द्वारा
گزر جان سے اور ڈر کچھ نہیں
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हम शक्ल कह दिया था रुख़ ला जवाब का
قمر جلالوی द्वारा
ہم شکل کہہ دیا تھا رخ لا جواب کا
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जब भी उस शख़्स को देखा जाये
Amjad Islam Amjad द्वारा
جب بھی اس شخص کو دیکھا جائے
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रात प्यासा था मेरे लहू का
मीर तक़ी मीर द्वारा
رات پیاسا تھا میرے لوہو کا
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जब से उस बेवफ़ा ने बाल रखे
मीर तक़ी मीर द्वारा
جب سے اس بے وفا نے بال رکھے
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किस हुस्न से कहूँ मैं उस की ख़ुश अख़्तरी की
मीर तक़ी मीर द्वारा
کس حسن سے کہوں میں اس کی خوش اختری کی
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निकले है जिंस-ए-हुस्न किसी कारवाँ में
मीर तक़ी मीर द्वारा
نکلے ہے جنس حسن کسی کاروان میں
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न पूछ ख़्वाब ज़ुलैख़ा ने क्या ख़याल लिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
نہ پوچھ خواب زلیخا نے کیا خیال لیا
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बुरक़ा उठा था रुख़ से मिरे बद-गुमाँ का
मीर तक़ी मीर द्वारा
برقع اٹھا تھا رخ سے مرے بد گمان کا
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