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हरम है क्या चीज़ देर क्या है किसी पे मेरी नज़र नहीं है
حرم ہے کیا چیز دیر کیا ہے کسی پہ میری نظر نہیں ہے
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ऐ सनम देर न कर अंजुमन आरा हो जा
اے صنم دیر نہ کر انجمن آرا ہو جا
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हम आप ही को अपना मक़सूद जानते हैं
ہم آپ ہی کو اپنا مقصود جانتے ہیں
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तुम हो शरीक-ए-ग़म तो मुझे कोई ग़म नहीं
تم ہو شریک غم تو مجھے کوئی غم نہیں
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अब तसव्वुर में हरम है न सनम ख़ाना है
اب تصور میں حرم ہے نہ صنم خانہ ہے
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