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तड़पना भी देखा न बिस्मिल का अपने
تڑپنا بھی دیکھا نہ بسمل کا اپنے
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तेरी अबरू ओ तेग़-ए-तेज़ तो हम-दम हैं ये दोनों
تری ابرو و تیغ تیز تو ہم دم ہیں یہ دونوں
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जिन्स-ए-गिराँ को तुझ से जो लोग चाहते हैं
جنس گراں کو تجھ سے جو لوگ چاہتے ہیں
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बज़्म से जब निगार उठता है
بزم سے جب نگار اٹھتا ہے
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नाम ही क्या निशाँ ही क्या ख़्वाब-ओ-ख़याल हो गए
نام ہی کیا نشاں ہی کیا خواب و خیال ہو گئے
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