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अधर आ कर शिकार-अफ़गन हमारा
ادھر آ کر شکار افگن ہمارا
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मैं भी दुनिया में हूँ इक नाला-ए-परेशाँ यक जा
میں بھی دنیا میں ہوں اک نالہ پریشاں یک جا
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दिल कितना आबाद हुआ जब दीद के घर बर्बाद हुए
دل کتنا آباد ہوا جب دید کے گھر برباد ہوئے
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मेरे दाग़-ए-दिल वो चराग़ हैं नहीं निस्बतें जिन्हें शाम से
مرے داغ دل وہ چراغ ہیں نہیں نسبتیں جنہیں شام سے
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तेरा ग़म रहे सलामत यही मेरी ज़िंदगी है
ترا غم رہے سلامت یہی میری زندگی ہے
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