Raah-e-Door-e-Ishq Mein Rota Hai Kya
راہ دور عشق میں روتا ہے کیا
राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्या
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंراہ دور عشق میں روتا ہے کیا
آگے آگے دیکھیے ہوتا ہے کیا
Raah-e-door-e-ishq mein rota hai kya
Aage aage dekhiye hota hai kya
राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्या
आगे आगे देखिए होता है क्या
قافلے میں صبح کے اک شور ہے
یعنی غافل ہم چلے سوتا ہے کیا
Qaafile mein subah ke ek shor hai
Ya'ni ghaafil hum chale sota hai kya
क़ाफ़िले में सुबह के एक शोर है
या'नी ग़ाफ़िल हम चले सोता है क्या
سبز ہوتی ہی نہیں یہ سرزمیں
تخم خواہش دل میں تو بوتا ہے کیا
Sabz hoti hi nahin yeh sarzameen
Tukhm-e-khwahish dil mein to bota hai kya
सब्ज़ होती ही नहीं यह सरज़मीं
तुख़्म-ए-ख़्वाहिश दिल में तो बोता है क्या

शास्त्रीय
मीर ताक़ी 'मीर' उर्दू के महानतम क्लासिक शायर हैं, जिन्हें 'ख़ुदा-ए-सुख़न' (शायरी का ईश्वर) कहा जाता है। उन्होंने जीवन के दुखों को बेहद सरल भाषा में ढालकर उर्दू ग़ज़ल को अमर बना दिया।
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