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कभी कभी याद में उभरते हैं नक़्श-ए-माज़ी मिटे मिटे से
فیض احمد فیض द्वारा
کبھی کبھی یاد میں ابھرتے ہیں نقشِ ماضی مٹے مٹے سے
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जिन के लिए अपने तो यूं जान निकलते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
جن کے لیے اپنے تو یوں جان نکلتے ہیں
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कोफ़्त से जान लब पे आई है
मीर तक़ी मीर द्वारा
کوفت سے جان لب پہ آئی ہے
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क्या करूं शरह-ए-ख़स्ता जानी की
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کروں شرح خستہ جانی کی
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न अब रक़ीब न नासेह न ग़म-गुसार कोई
فیض احمد فیض द्वारा
نہ اب رقیب نہ ناصح نہ غم گسار کوئی
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तुम्हारा हाथ जब मेरे लरज़ते हाथ से छूटा ख़िज़ाँ के आख़िरी दिन थे
Amjad Islam Amjad द्वारा
تمہارا ہاتھ جب میرے لرزتے ہاتھ سے چھوٹا خزاں کے آخری دن تھے
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दिल साफ़ हो तो जल्वा गह-ए-यार क्यों न हो
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل صاف ہو تو جلوہ گہہ یار کیوں نہ ہو
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हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया
परवीन शाकिर द्वारा
ہم نے ہی لوٹنے کا ارادہ نہیں کیا
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जगा सके न तिरे लब लकीर ऐसी थी
परवीन शाकिर द्वारा
جگا سکے نہ ترے لب لکیر ایسی تھی
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रुकने का समय गुज़र गया है
परवीन शाकिर द्वारा
رکنے کا سمے گزر گیا ہے
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इक हुनर था कमाल था क्या था
परवीन शाकिर द्वारा
اک ہنر تھا کمال تھا کیا تھا
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शब था नालाँ अज़ीज़ कोई था
मीर तक़ी मीर द्वारा
شب تھا نالاں عزیز کوئی تھا
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याद उसे इंतिहाई करते हैं
जौन एलिया द्वारा
یاد اسے انتہائی کرتے ہیں
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नश्शा-ए-शौक़ रंग में तुझ से जुदाई की गई
जौन एलिया द्वारा
نشۂ شوق رنگ میں تجھ سے جدائی کی گئی
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चलो बाद-ए-बहारी जा रही है
जौन एलिया द्वारा
چلو باد بہاری جا رہی ہے
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बहुत दिल को कुशादा कर लिया क्या
जौन एलिया द्वारा
بہت دل کو کشادہ کر لیا کیا
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जफ़ाएँ देख लियां बे-वफ़ाइयाँ देखें
मीर तक़ी मीर द्वारा
جفائیں دیکھ لیں یاں بے وفائیاں دیکھیں
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किसी की आँख में ख़ुद को तलाश करना है
Amjad Islam Amjad द्वारा
کسی کی آنکھ میں خود کو تلاش کرنا ہے
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अपनी ही सदा सुनूँ कहाँ तक
परवीन शाकिर द्वारा
اپنی ہی صدا سنوں کہاں تک
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जो तू ही सनम हम से बेज़ार होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو تو ہی صنم ہم سے بے زار ہوگا
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