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क़ुर्बतों में भी जुदाई के ज़माने माँगे
अहमद फ़राज़ द्वारा
قربتوں میں بھی جدائی کے زمانے مانگے
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बे-यार शहर-ए-दिल का वीरान हो रहा है
मीर तक़ी मीर द्वारा
بے یار شہر دل کا ویران ہو رہا ہے
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रफ़्तगां में जहां के हम भी हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
رفتگاں میں جہاں کے ہم بھی ہیں
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माइल-ब-करम मुझ पर हो जाएं तो अच्छा हो
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مائل بہ کرم مجھ پر ہو جائیں تو اچھا ہو
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ढूंढा न पाईए जो इस वक़्त में सो ज़र है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ڈھونڈا نہ پائیے جو اس وقت میں سو زر ہے
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तुम आए हो न शब-ए-इंतज़ार गुज़री है
فیض احمد فیض द्वारा
تم آئے ہو نہ شب انتظار گزری ہے
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लज़्ज़त से नहीं ख़ाली जानों का खपा जाना
मीर तक़ी मीर द्वारा
لذت سے نہیں خالی جانوں کا کھپا جانا
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सभी कुछ है तेरा दिया हुआ
فیض احمد فیض द्वारा
سبھی کچھ ہے تیرا دیا ہوا
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आह-ए-सहर ने सोज़िश-ए-दिल को मिटा दिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
آہ سحر نے سوزش دل کو مٹا دیا
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गुस्से से उठ चले हो तो दामन को झाड़ कर
मीर तक़ी मीर द्वारा
غصے سے اٹھ چلے ہو تو دامن کو جھاڑ کر
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ये ग़म क्या दिल की आदत है, नहीं तो
जौन एलिया द्वारा
یہ غم کیا دل کی عادت ہے نہیں تو
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इस का ख़राम देख के जाया न जाएगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
اس کا خرام دیکھ کے جایا نہ جائے گا
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अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
ابھی کچھ اور کرشمے غزل کے دیکھتے ہیں
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बारहा गोर-ए-दिल झंका लाया
मीर तक़ी मीर द्वारा
بارہا گور دل جھنکا لایا
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ग़ज़ल मीरؔ की कब पढ़ाई नहीं
मीर तक़ी मीर द्वारा
غزل میرؔ کی کب پڑھائی نہیں
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झुमके दिखा के तूर को जिन ने जला दिया
मीर तक़ी मीर द्वारा
جھمکے دکھا کے طور کو جن نے جلا دیا
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हिम्मत-ए-इल्तिजा नहीं बाक़ी
فیض احمد فیض द्वारा
ہمت التجا نہیں باقی
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हिज्र की आँखों से आँखें तो मिलाते जाइये
जौन एलिया द्वारा
ہجر کی آنکھوں سے آنکھیں تو ملاتے جائیے
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कब तक दिल की खैर मनाएं कब तक रह दिखलाओगे
فیض احمد فیض द्वारा
کب تک دل کی خیر منائیں کب تک رہ دکھلاؤ گے
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तुझे पुकारा है बे-इरादा
فیض احمد فیض द्वारा
تجھے پکارا ہے بے ارادہ
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