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नई तर्ज़ों से मयख़ाने में रंग-ए-मय झलकता था
نئی طرزوں سے میخانے میں رنگ مے جھلکتا تھا
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अजब इक तौर है जो हम सितम ईजाद रखें
عجب اک طور ہے جو ہم ستم ایجاد رکھیں
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जब जुनूँ से हमें तवस्सुल था
جب جنوں سے ہمیں توسل تھا
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हम तेरा हिज्र मनाने के लिए निकले हैं
ہم ترا ہجر منانے کے لیے نکلے ہیں
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मुझे ग़र्ज़ है मेरी जान ग़ुल मचाने से
مجھے غرض ہے مری جان غل مچانے سے
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