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कशमकश

सभी 83अशआर 0ग़ज़ल 83
ग़ज़ल83
क़ुर्बतों में भी जुदाई के ज़माने माँगे
قربتوں میں بھی جدائی کے زمانے مانگے
वो तफ़ावुतें हैं मरे ख़ुदा कि ये तो नहीं कोई और है
وہ تفاوتیں ہیں مرے خدا کہ یہ تو نہیں کوئی اور ہے
कुछ फ़ैसला तो हो कि किधर जाना चाहिए
کچھ فیصلہ تو ہو کہ کدھر جانا چاہیے
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
کچھ تو ہوا بھی سرد تھی کچھ تھا ترا خیال بھی
शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें
شرمندگی ہے ہم کو بہت ہم ملے تمہیں
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