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क़ुर्बतों में भी जुदाई के ज़माने माँगे
अहमद फ़राज़ द्वारा
قربتوں میں بھی جدائی کے زمانے مانگے
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वो तफ़ावुतें हैं मरे ख़ुदा कि ये तो नहीं कोई और है
अहमद फ़राज़ द्वारा
وہ تفاوتیں ہیں مرے خدا کہ یہ تو نہیں کوئی اور ہے
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कुछ फ़ैसला तो हो कि किधर जाना चाहिए
परवीन शाकिर द्वारा
کچھ فیصلہ تو ہو کہ کدھر جانا چاہیے
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कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी
परवीन शाकिर द्वारा
کچھ تو ہوا بھی سرد تھی کچھ تھا ترا خیال بھی
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शर्मिंदगी है हम को बहुत हम मिले तुम्हें
जौन एलिया द्वारा
شرمندگی ہے ہم کو بہت ہم ملے تمہیں
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अभी फ़रमान आया है वहाँ से
जौन एलिया द्वारा
ابھی فرمان آیا ہے وہاں سے
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यह किस खलिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया
فیض احمد فیض द्वारा
یہ کس خلش نے پھر اس دل میں آشیانہ کیا
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ये ग़म क्या दिल की आदत है, नहीं तो
जौन एलिया द्वारा
یہ غم کیا دل کی عادت ہے نہیں تو
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अभी कुछ और करिश्मे ग़ज़ल के देखते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
ابھی کچھ اور کرشمے غزل کے دیکھتے ہیں
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अपने सब यार काम कर रहे हैं
जौन एलिया द्वारा
اپنے سب یار کام کر رہے ہیں
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हमें से अपनी नवा हम-कलाम होती रही
فیض احمد فیض द्वारा
ہمیں سے اپنی نوا ہم کلام ہوتی رہی
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मुस्तक़िल महरूमियों पर भी तो दिल माना नहीं
अहमद फ़राज़ द्वारा
مستقل محرومیوں پر بھی تو دل مانا نہیں
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जब तुझे याद करें कार-ए-जहाँ खींचता है
अहमद फ़राज़ द्वारा
جب تجھے یاد کریں کار جہاں کھینچتا ہے
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किसी जानिब से भी परचम न लहू का निकला
अहमद फ़राज़ द्वारा
کسی جانب سے بھی پرچم نہ لہو کا نکلا
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खुली आँखों में सपना झाँकता है
परवीन शाकिर द्वारा
کھلی آنکھوں میں سپنا جھانکتا ہے
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है फ़सीलें उठा रहा मुझ में
जौन एलिया द्वारा
ہے فصیلیں اٹھا رہا مجھ میں
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क़ुर्बत भी नहीं दिल से उतर भी नहीं जाता
अहमद फ़राज़ द्वारा
قربت بھی نہیں دل سے اتر بھی نہیں جاتا
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यूँ ही मर मर के जिएँ वक़्त गुज़ारे जाएँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
یوں ہی مر مر کے جئیں وقت گزارے جائیں
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तेरे क़रीब आ के बड़ी उलझनों में हूँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
تیرے قریب آ کے بڑی الجھنوں میں ہوں
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गनवाई किस की तमन्ना में ज़िंदगी मैंने
जौन एलिया द्वारा
گنوائی کس کی تمنا میں زندگی میں نے
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