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कशमकश

सभी 83अशआर 0ग़ज़ल 83
ग़ज़ल83
शिकवा अव्वल तो बे-हिसाब किया
شکوہ اول تو بے حساب کیا
न कोई हिज्र न कोई विसाल है शायद
نہ کوئی ہجر نہ کوئی وصال ہے شاید
आवाज़ के हम राह सरापा भी तो देखूँ
آواز کے ہم راہ سراپا بھی تو دیکھوں
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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