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गुमान यही है कि दिल ख़ुद इधर को जाता है
گماں یہی ہے کہ دل خود ادھر کو جاتا ہے
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देखता रहता हूँ मैं जो कुछ परेशानी करे
دیکھتا رہتا ہوں میں جو کچھ پریشانی کرے
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रब्त है नाज़-ए-बुताँ को तो मिरी जान के साथ
ربط ہے ناز بتاں کو تو مری جان کے ساتھ
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क़दमों में भी तकान थी घर भी क़रीब था
قدموں میں بھی تکان تھی گھر بھی قریب تھا
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ये पैहम तल्ख़-कामी सी रही क्या
یہ پیہم تلخ کامی سی رہی کیا
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