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न हम रहे न वो ख़्वाबों की ज़िंदगी ही रही
जौन एलिया द्वारा
نہ ہم رہے نہ وہ خوابوں کی زندگی ہی رہی
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ख़्वाब के रंग दिल-ओ-जाँ में सजाए भी गए
जौन एलिया द्वारा
خواب کے رنگ دل و جاں میں سجائے بھی گئے
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ख़्वाब की हालतों के साथ तेरी हिकायतों में हैं
जौन एलिया द्वारा
خواب کی حالتوں کے ساتھ تیری حکایتوں میں ہیں
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हम भी शायर थे कभी जान-ए-सुख़न याद नहीं
अहमद फ़राज़ द्वारा
ہم بھی شاعر تھے کبھی جان سخن یاد نہیں
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ख़ूब थे वे दिन कि हम तेरे गिरफ़्तारों में थे
मीर तक़ी मीर द्वारा
خوب تھے وے دن کہ ہم تیرے گرفتاروں میں تھے
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शाम थी और बर्ग-ओ-गुल शल थे मगर सबा भी थी
जौन एलिया द्वारा
شام تھی اور برگ و گل شل تھے مگر صبا بھی تھی
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जला दिया शजर-ए-जाँ के सब्ज़ बख़्त न था
परवीन शाकिर द्वारा
جلا دیا شجر جاں کہ سبز بخت نہ تھا
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ज़िंदगी बे-साइबाँ बे-घर कहीं ऐसी न थी
परवीन शाकिर द्वारा
زندگی بے سائباں بے گھر کہیں ایسی نہ تھی
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