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मयख़ाना

सभी 41अशआर 0ग़ज़ल 41
ग़ज़ल41
मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जला होती है
ہاں وہی عشق و محبت کی جلا ہوتی ہے
मुँह तका ही करे है जिस तिस का
منہ تکا ہی کرے ہے جس تس کا
जब नाम तेरा लीजिए तब चश्म भर आवे
جب نام ترا لیجیے تب چشم بھر آوے
दिल में अब यूं तेरे भूले हुए ग़म आते हैं
دل میں اب یوں ترے بھولے ہوئے غم آتے ہیں
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