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मेरी लौ लगी है तुझसे ग़म-ए-ज़िंदगी मिटा दे
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
مری لو لگی ہے تجھ سے غم زندگی مٹا دے
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हाँ वही इश्क़-ओ-मोहब्बत की जला होती है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہاں وہی عشق و محبت کی جلا ہوتی ہے
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मुँह तका ही करे है जिस तिस का
मीर तक़ी मीर द्वारा
منہ تکا ہی کرے ہے جس تس کا
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जब नाम तेरा लीजिए तब चश्म भर आवे
मीर तक़ी मीर द्वारा
جب نام ترا لیجیے تب چشم بھر آوے
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दिल में अब यूं तेरे भूले हुए ग़म आते हैं
فیض احمد فیض द्वारा
دل میں اب یوں ترے بھولے ہوئے غم آتے ہیں
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हुस्न मरहून जोश-ए-बादः-ए-नाज़
فیض احمد فیض द्वारा
حسن مرہون جوش بادۂ ناز
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चलते हो तो चमन को चलिये कहते हैं कि बहारां है
मीर तक़ी मीर द्वारा
چلتے ہو تو چمن کو چلئے کہتے ہیں کہ بہاراں ہے
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यूं बहार आई है इस बार कि जैसे क़ासिद
فیض احمد فیض द्वारा
یوں بہار آئی ہے اس بار کہ جیسے قاصد
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यारो मुझे माफ़ रखो मैं नशे में हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
یارو مجھے معاف رکھو میں نشے میں ہوں
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अब तसव्वुर में हरम है न सनम ख़ाना है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
اب تصور میں حرم ہے نہ صنم خانہ ہے
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आम हुक्म-ए-शराब करता हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
عام حکم شراب کرتا ہوں
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वहीं हैं दिल के क़राइन तमाम कहते हैं
فیض احمد فیض द्वारा
وہیں ہیں دل کے قرائن تمام کہتے ہیں
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गो सब को बहम सागर-ओ-बादा तो नहीं था
فیض احمد فیض द्वारा
گو سب کو بہم ساغر و بادہ تو نہیں تھا
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दुनिया के हर ख़याल से बेगाना कर दिया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
دنیا کے ہر خیال سے بیگانہ کر دیا
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आप बैठे हैं बालें पे मेरी मौत का ज़ोर चलता नहीं है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
آپ بیٹھے ہیں بالیں پہ میری موت کا زور چلتا نہیں ہے
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चश्म-ए-मैगूं ज़रा इधर कर दे
فیض احمد فیض द्वारा
چشم میگوں ذرا ادھر کر دے
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हर सिम्त परेशां तेरी आमद के क़रीने
فیض احمد فیض द्वारा
ہر سمت پریشاں تری آمد کے قرینے
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देखते हैं रक़्स में दिन रात पैमाने को हम
قمر جلالوی द्वारा
دیکھتے ہیں رقص میں دن رات پیمانے کو ہم
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फिर उस से तरह कुछ जो दावे की सी डाली है
मीर तक़ी मीर द्वारा
پھر اس سے طرح کچھ جو دعوے کی سی ڈالی ہے
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मेरे रश्क-ए-क़मर तू ने पहली नज़र जब नज़र से मिलाई मज़ा आ गया
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
میرے رشکِ قمر تو نے پہلی نظر جب نظر سے ملائی مزا آ گیا
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