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मोहब्बत

सभी 9अशआर 0ग़ज़ल 9
ग़ज़ल9
ज़िंदगी से यही गिला है मुझे
زندگی سے یہی گلہ ہے مجھے
ये क्या कि सब से बयाँ दिल की हालतें करनी
یہ کیا کہ سب سے بیاں دل کی حالتیں کرنی
जब कभी ख़ूबी-ए-क़िस्मत से तुझे देखते हैं
جب کبھی خوبیٔ قسمت سے تجھے دیکھتے ہیں
निकले वो फूल बन के तेरे गुलिस्तां से हम
نکلے وہ پھول بن کے ترے گلستاں سے ہم
चाक पीराहनी-ए-गुुल को सबा जानती है
چاک پیراہنیٔ گل کو صبا جانتی ہے
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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