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ज़िंदगी से यही गिला है मुझे
زندگی سے یہی گلہ ہے مجھے
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ये क्या कि सब से बयाँ दिल की हालतें करनी
یہ کیا کہ سب سے بیاں دل کی حالتیں کرنی
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जब कभी ख़ूबी-ए-क़िस्मत से तुझे देखते हैं
جب کبھی خوبیٔ قسمت سے تجھے دیکھتے ہیں
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निकले वो फूल बन के तेरे गुलिस्तां से हम
نکلے وہ پھول بن کے ترے گلستاں سے ہم
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चाक पीराहनी-ए-गुुल को सबा जानती है
چاک پیراہنیٔ گل کو صبا جانتی ہے
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