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जब हम कलाम हम से होता है पान खा कर
جب ہم کلام ہم سے ہوتا ہے پان کھا کر
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पैंस में गुज़रते हैं जो कूचे से वो मेरे
پینس میں گزرتے ہیں جو کوچے سے وہ میرے
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जो मैं न हूँ तो करो तर्क नाज़ करने को
جو میں نہ ہوں تو کرو ترک ناز کرنے کو
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रब्त है नाज़-ए-बुताँ को तो मिरी जान के साथ
ربط ہے ناز بتاں کو تو مری جان کے ساتھ
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गिला नहीं है हमें अपनी जाँ-गुदाज़ी का
گلا نہیں ہے ہمیں اپنی جاں گدازی کا
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