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नाज़

सभी 5अशआर 0ग़ज़ल 5
ग़ज़ल5
जब हम कलाम हम से होता है पान खा कर
جب ہم کلام ہم سے ہوتا ہے پان کھا کر
पैंस में गुज़रते हैं जो कूचे से वो मेरे
پینس میں گزرتے ہیں جو کوچے سے وہ میرے
जो मैं न हूँ तो करो तर्क नाज़ करने को
جو میں نہ ہوں تو کرو ترک ناز کرنے کو
रब्त है नाज़-ए-बुताँ को तो मिरी जान के साथ
ربط ہے ناز بتاں کو تو مری جان کے ساتھ
गिला नहीं है हमें अपनी जाँ-गुदाज़ी का
گلا نہیں ہے ہمیں اپنی جاں گدازی کا
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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