Rabt Hai Naaz-e-Butaan Ko To Miri Jaan Ke Saath
ربط ہے ناز بتاں کو تو مری جان کے ساتھ
रब्त है नाज़-ए-बुताँ को तो मिरी जान के साथ
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंربط ہے ناز بتاں کو تو مری جان کے ساتھ
جی ہے وابستہ مرا ان کی ہر اک آن کے ساتھ
Rabt hai naaz-e-butaan ko to miri jaan ke saath
Jee hai waabasta mira un ki har ik aan ke saath
रब्त है नाज़-ए-बुताँ को तो मिरी जान के साथ
जी है वाबस्ता मिरा उन की हर इक आन के साथ
اپنے ہاتھوں کے بھی میں زور کا دیوانہ ہوں
رات دن کشتی ہی رہتی ہے گریبان کے ساتھ
Apne haathon ke bhi main zor ka deewana hoon
Raat din kushti hi rehti hai garebaan ke saath
अपने हाथों के भी मैं ज़ोर का दीवाना हूँ
रात दिन कुश्ती ही रहती है गरेबाँ के साथ
جو جفا جو ہیں انہیں سنگ دلی لازم ہے
کام تلوار کو رہتا ہے سدا سان کے ساتھ
Jo jafa-jo hain unhein sang-dili laazim hai
Kaam talwaar ko rehta hai sada saan ke saath
जो जफ़ा-जो हैं उन्हें संग-दिली लाज़िम है
काम तलवार को रहता है सदा सान के साथ

शास्त्रीय
ख़्वाजा मीर दर्द अठारहवीं सदी के एक जाने-माने सूफी शायर और संगीत के मर्मज्ञ थे, जिनकी शायरी तसव्वुफ, इलाही इश्क और रूहानी गहराई की मिसाल है।
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