Dozdeeda Nigah Karna Phir Aankh Milana Bhi
دزدیدہ نگہ کرنا پھر آنکھ ملانا بھی
दोज़्दीदा निगह करना फिर आँख मिलाना भी
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंدزدیدہ نگہ کرنا پھر آنکھ ملانا بھی
اس لوٹتے دامن کو پاس آ کے اٹھانا بھی
Dozdeeda nigah karna phir aankh milana bhi
Us loot'te daaman ko paas aa ke uthana bhi
दोज़्दीदा निगह करना फिर आँख मिलाना भी
उस लूटते दामन को पास आ के उठाना भी
پامالی عاشق کو منظور رکھے جانا
پھر چال کڈھب چلنا ٹھوکر نہ لگانا بھی
Paamaali-e-aashiq ko manzoor rakhe jaana
Phir chaal kadhab chalna thokar na lagaana bhi
पामाली-ए-आशिक़ को मंज़ूर रखे जाना
फिर चाल कढब चलना ठोकर न लगाना भी
برقع کو اٹھا دینا پر آدھے ہی چہرے سے
کیا منہ کو چھپانا بھی کچھ جھمکی دکھانا بھی
Burqe ko utha dena par aadhe hi chehre se
Kya munh ko chhupana bhi kuchh jhumki dikhana bhi
बुर्क़े को उठा देना पर आधे ही चेहरे से
क्या मुँह को छुपाना भी कुछ झुमकी दिखाना भी

शास्त्रीय
मीर ताक़ी 'मीर' उर्दू के महानतम क्लासिक शायर हैं, जिन्हें 'ख़ुदा-ए-सुख़न' (शायरी का ईश्वर) कहा जाता है। उन्होंने जीवन के दुखों को बेहद सरल भाषा में ढालकर उर्दू ग़ज़ल को अमर बना दिया।
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