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वक़्त-ए-रुख़्सत आ गया दिल फिर भी घबराया नहीं
وقت رخصت آ گیا دل پھر بھی گھبرایا نہیں
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दिल पे इक तरफ़ा क़यामत करना
دل پہ اک طرفہ قیامت کرنا
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रुकने का समय गुज़र गया है
رکنے کا سمے گزر گیا ہے
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चारा-साज़ों की अज़ीयत नहीं देखी जाती
چارہ سازوں کی اذیت نہیں دیکھی جاتی
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तोहमत चंद अपने ज़िम्मे धर चले
تہمت چند اپنے ذمے دھر چلے
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