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रुख़्सत

सभी 5अशआर 0ग़ज़ल 5
ग़ज़ल5
वक़्त-ए-रुख़्सत आ गया दिल फिर भी घबराया नहीं
وقت رخصت آ گیا دل پھر بھی گھبرایا نہیں
दिल पे इक तरफ़ा क़यामत करना
دل پہ اک طرفہ قیامت کرنا
रुकने का समय गुज़र गया है
رکنے کا سمے گزر گیا ہے
चारा-साज़ों की अज़ीयत नहीं देखी जाती
چارہ سازوں کی اذیت نہیں دیکھی جاتی
तोहमत चंद अपने ज़िम्मे धर चले
تہمت چند اپنے ذمے دھر چلے
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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