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चांद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का
چاند نکلے کسی جانب تری زیبائی کا
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ताना ज़न था हर कोई हम पर दिल-ए-नादाँ समेत
طعنہ زن تھا ہر کوئی ہم پر دل ناداں سمیت
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ऐ दोस्त कोई मुझ सा रुस्वा न हुआ होगा
اے دوست کوئی مجھ سا رسوا نہ ہوا ہوگا
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चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया
چلنے کا حوصلہ نہیں رکنا محال کر دیا
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कब मेरा नशीमन अहल-ए-चमन गुलशन में गवारा करते हैं
کب میرا نشیمن اہل چمن گلشن میں گوارا کرتے ہیں
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