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चांद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का
فیض احمد فیض द्वारा
چاند نکلے کسی جانب تری زیبائی کا
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ताना ज़न था हर कोई हम पर दिल-ए-नादाँ समेत
अहमद फ़राज़ द्वारा
طعنہ زن تھا ہر کوئی ہم پر دل ناداں سمیت
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ऐ दोस्त कोई मुझ सा रुस्वा न हुआ होगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
اے دوست کوئی مجھ سا رسوا نہ ہوا ہوگا
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चलने का हौसला नहीं रुकना मुहाल कर दिया
परवीन शाकिर द्वारा
چلنے کا حوصلہ نہیں رکنا محال کر دیا
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कब मेरा नशीमन अहल-ए-चमन गुलशन में गवारा करते हैं
قمر جلالوی द्वारा
کب میرا نشیمن اہل چمن گلشن میں گوارا کرتے ہیں
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एक सूरज था कि तारों के घराने से उठा
परवीन शाकिर द्वारा
ایک سورج تھا کہ تاروں کے گھرانے سے اٹھا
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हो गई शहर शहर रुसवाई
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہو گئی شہر شہر رسوائی
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कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को
قمر جلالوی द्वारा
کبھی کہا نہ کسی سے ترے فسانے کو
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आह को समझे हो क्या दिल से अगर हो जाएगी
قمر جلالوی द्वारा
آہ کو سمجھے ہو کیا دل سے اگر ہو جائے گی
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याद अय्याम कि याँ तर्क-ए-शकेबाई था
मीर तक़ी मीर द्वारा
یاد ایام کہ یاں ترک شکیبائی تھا
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चाक पीराहनी-ए-गुुल को सबा जानती है
अहमद फ़राज़ द्वारा
چاک پیراہنیٔ گل کو صبا جانتی ہے
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कसरत-ए-दाग़ से दिल रश्क-ए-गुलिस्ताँ न हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
کثرت داغ سے دل رشک گلستاں نہ ہوا
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ख़ुदा के वास्ते ऐ ख़ून-ए-दिल ज़ाहिर हो पैकाँ पर
قمر جلالوی द्वारा
خدا کے واسطے اے خون دل ظاہر ہو پیکاں پر
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सोज़-ए-ग़म-ए-फ़िराक़ से दिल को बचाए कौन
قمر جلالوی द्वारा
سوز غم فراق سے دل کو بچائے کون
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चलो बाद-ए-बहारी जा रही है
जौन एलिया द्वारा
چلو باد بہاری جا رہی ہے
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ख़ातिर करे है जमा वो हर बार एक तरह
मीर तक़ी मीर द्वारा
خاطر کرے ہے جمع وہ ہر بار ایک طرح
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ताक़त नहीं है दिल में ने जी बजा रहा है
मीर तक़ी मीर द्वारा
طاقت نہیں ہے دل میں نے جی بجا رہا ہے
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अजब हालत हमारी हो गई है
जौन एलिया द्वारा
عجب حالت ہماری ہو گئی ہے
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बजुज़ तुम्हारे किसी से कोई सवाल नहीं
قمر جلالوی द्वारा
بجز تمہارے کسی سے کوئی سوال نہیں
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तुम में जो बात है वो बात नहीं आई है
قمر جلالوی द्वारा
تم میں جو بات ہے وہ بات نہیں آئی ہے
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