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शम्अ

सभी 9अशआर 0ग़ज़ल 9
ग़ज़ल9
दिल बहम पहुँचा बदन में तब से सारा तन जला
دل بہم پہنچا بدن میں تب سے سارا تن جلا
आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
آئے کچھ ابر کچھ شراب آئے
यूं बहार आई है इस बार कि जैसे क़ासिद
یوں بہار آئی ہے اس بار کہ جیسے قاصد
सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते
سلسلے توڑ گیا وہ سبھی جاتے جاتے
शाम-ए-फ़िराक़ अब ना पूछ आई और आ के टल गई
شام فراق اب نہ پوچھ آئی اور آ کے ٹل گئی
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उर्दू अदब की रूह की हिफ़ाज़त

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