ADABKHANA
शोअरा
ग़ज़लें
अशआर
मुहावरे
लुग़त
और
कुल्लियात
टैग्स
खोज
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
ENG
URD
HIN
Login
प्रोफ़ाइल संपादित करें
मेरी पसंदीदा
लॉग आउट
खोज
लॉगिन
रजिस्टर करें
लॉगिन करें
खाता बनाएँ
← टैग्स पर वापस
शम्अ
सभी
9
अशआर
0
ग़ज़ल
9
ग़ज़ल
9
0
दिल बहम पहुँचा बदन में तब से सारा तन जला
دل بہم پہنچا بدن میں تب سے سارا تن جلا
0
आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
آئے کچھ ابر کچھ شراب آئے
0
यूं बहार आई है इस बार कि जैसे क़ासिद
یوں بہار آئی ہے اس بار کہ جیسے قاصد
0
सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते
سلسلے توڑ گیا وہ سبھی جاتے جاتے
0
शाम-ए-फ़िराक़ अब ना पूछ आई और आ के टल गई
شام فراق اب نہ پوچھ آئی اور آ کے ٹل گئی
सभी देखें
कवियों की सूची
कवियों
और जानें