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दिल बहम पहुँचा बदन में तब से सारा तन जला
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل بہم پہنچا بدن میں تب سے سارا تن جلا
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आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
فیض احمد فیض द्वारा
آئے کچھ ابر کچھ شراب آئے
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यूं बहार आई है इस बार कि जैसे क़ासिद
فیض احمد فیض द्वारा
یوں بہار آئی ہے اس بار کہ جیسے قاصد
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सिलसिले तोड़ गया वो सभी जाते जाते
अहमद फ़राज़ द्वारा
سلسلے توڑ گیا وہ سبھی جاتے جاتے
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शाम-ए-फ़िराक़ अब ना पूछ आई और आ के टल गई
فیض احمد فیض द्वारा
شام فراق اب نہ پوچھ آئی اور آ کے ٹل گئی
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मुस्तौजिब-ए-ज़ुल्म-ओ-सितम-ओ-जौर-ओ-जफ़ा हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
مستوجب ظلم و ستم و جور و جفا ہوں
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ख़ुदा के वास्ते ऐ ख़ून-ए-दिल ज़ाहिर हो पैकाँ पर
قمر جلالوی द्वारा
خدا کے واسطے اے خون دل ظاہر ہو پیکاں پر
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गर्मी से मैं तो आतिश-ए-ग़म की पिघल गया
मीर तक़ी मीर द्वारा
گرمی سے میں تو آتش غم کی پگھل گیا
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मैंने जो बे-कसाना मज्लिस में जान खोई
मीर तक़ी मीर द्वारा
میں نے جو بے کسانہ مجلس میں جان کھوئی
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