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उम्र भर हम रहे शराबी से
عمر بھر ہم رہے شرابی سے
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लब तेरे लअल-ए-नाब हैं दोनों
لب ترے لعل ناب ہیں دونوں
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आम हुक्म-ए-शराब करता हूँ
عام حکم شراب کرتا ہوں
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देखते हैं रक़्स में दिन रात पैमाने को हम
دیکھتے ہیں رقص میں دن رات پیمانے کو ہم
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न सह सका जब मुसाफ़तों के अज़ाब सारे
نہ سہہ سکا جب مسافتوں کے عذاب سارے
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