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उम्र भर हम रहे शराबी से
मीर तक़ी मीर द्वारा
عمر بھر ہم رہے شرابی سے
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लब तेरे लअल-ए-नाब हैं दोनों
मीर तक़ी मीर द्वारा
لب ترے لعل ناب ہیں دونوں
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आम हुक्म-ए-शराब करता हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
عام حکم شراب کرتا ہوں
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देखते हैं रक़्स में दिन रात पैमाने को हम
قمر جلالوی द्वारा
دیکھتے ہیں رقص میں دن رات پیمانے کو ہم
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न सह सका जब मुसाफ़तों के अज़ाब सारे
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ سہہ سکا جب مسافتوں کے عذاب سارے
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पीते ही सुर्ख़ आँखें हैं मस्त शराब की
قمر جلالوی द्वारा
پیتے ہی سرخ آنکھیں ہیں مست شراب کی
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शहर से यार सवार हुआ जो सवाद में ख़ूब ग़ुबार है आज
मीर तक़ी मीर द्वारा
شہر سے یار سوار ہوا جو سواد میں خوب غبار ہے آج
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बदन में आग है चेहरा गुलाब जैसा है
अहमद फ़राज़ द्वारा
بدن میں آگ ہے چہرہ گلاب جیسا ہے
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वाँ वो तो घर से अपने पी कर शराब निकला
मीर तक़ी मीर द्वारा
واں وہ تو گھر سے اپنے پی کر شراب نکلا
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बात कोई उम्मीद की मुझ से नहीं कही गई
जौन एलिया द्वारा
بات کوئی امید کی مجھ سے نہیں کہی گئی
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आख़िरी बार आह कर ली है
जौन एलिया द्वारा
آخری بار آہ کر لی ہے
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कल शब-ए-हिज्राँ थी लब पर नाला-ए-बीमाराना था
मीर तक़ी मीर द्वारा
کل شب ہجراں تھی لب پر نالہ بیمارانہ تھا
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बस्कि दौड़े है रग-ए-ताक में ख़ूँ हो हो कर
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
بسکہ دوڑے ہے رگ تاک میں خوں ہو ہو کر
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शाम तक मेरी बेकली है शराब
जौन एलिया द्वारा
شام تک میری بیکلی ہے شراب
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