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नया इक रिश्ता पैदा क्यों करें हम
जौन एलिया द्वारा
نیا اک رشتہ پیدا کیوں کریں ہم
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तेरे क़रीब आ के बड़ी उलझनों में हूँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
تیرے قریب آ کے بڑی الجھنوں میں ہوں
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दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला
अहमद फ़राज़ द्वारा
دوست بن کر بھی نہیں ساتھ نبھانے والا
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शैख़ आख़िर ये सुराही है कोई ख़ुम तो नहीं
قمر جلالوی द्वारा
شیخ آخر یہ صراحی ہے کوئی خم تو نہیں
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ऐ मेरे हम-नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं
قمر جلالوی द्वारा
اے مرے ہم نشیں چل کہیں اور چل اس چمن میں اب اپنا گزارہ نہیں
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ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है
Amjad Islam Amjad द्वारा
یہ جو حاصل ہمیں ہر شے کی فراوانی ہے
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रही न पुख़्तगी आलम में दौर-ए-ख़ामी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
رہی نہ پختگی عالم میں دور خامی ہے
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दिल ने वफ़ा के नाम पर कार-ए-वफ़ा नहीं किया
जौन एलिया द्वारा
دل نے وفا کے نام پر کار وفا نہیں کیا
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जो दिन था एक मुसीबत तो रात भारी थी
Amjad Islam Amjad द्वारा
جو دن تھا ایک مصیبت تو رات بھاری تھی
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है हाल जाए गिर्यः जान पर आरज़ू का
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہے حال جائے گریہ جان پر آرزو کا
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जो देखो मिरे शेर-ए-तर की तरफ़
मीर तक़ी मीर द्वारा
جو دیکھو مرے شعر تر کی طرف
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कहना तिरे मुँह पर तो निपट बे-अदबी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
کہنا ترے منہ پر تو نپٹ بے ادبی ہے
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कसरत-ए-दाग़ से दिल रश्क-ए-गुलिस्ताँ न हुआ
मीर तक़ी मीर द्वारा
کثرت داغ سے دل رشک گلستاں نہ ہوا
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जब हम कलाम हम से होता है पान खा कर
मीर तक़ी मीर द्वारा
جب ہم کلام ہم سے ہوتا ہے پان کھا کر
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क़रार दिल का ये काहे को ढंग था आगे
मीर तक़ी मीर द्वारा
قرار دل کا یہ کاہے کو ڈھنگ تھا آگے
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नक़्क़ाश देख तो मैं क्या नक़्श-ए-यार खेंचा
मीर तक़ी मीर द्वारा
نقاش دیکھ تو میں کیا نقش یار کھینچا
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दिल की तकलीफ़ कम नहीं करते
जौन एलिया द्वारा
دل کی تکلیف کم نہیں کرتے
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बाग़-ए-आलम में रहे शादी-ओ-मातम की तरह
قمر جلالوی द्वारा
باغ عالم میں رہے شادی و ماتم کی طرح
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सांस इन के मरीज़-ए-हसरत की रुक रुक के चलती जाती है
قمر جلالوی द्वारा
سانس ان کے مریض حسرت کی رک رک کے چلتی جاتی ہے
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तपते सहराओं पे गिरजा सर-ए-दरिया बरसा
अहमद फ़राज़ द्वारा
تپتے صحراؤں پہ گرجا سر دریا برسا
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