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तुझी को जो याँ जल्वा फ़रमा न देखा
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
تجھی کو جو یاں جلوہ فرما نہ دیکھا
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वैसा कहाँ है हम से जैसा कि आगे था तू
मीर तक़ी मीर द्वारा
ویسا کہاں ہے ہم سے جیسا کہ آگے تھا تو
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कहते हो इत्तिहाद है हम को
मीर तक़ी मीर द्वारा
کہتے ہو اتحاد ہے ہم کو
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मशहूर हैं दिलों की मिरे बे-क़रारियाँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
مشہور ہیں دلوں کی مرے بے قراریاں
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हम ने ही लौटने का इरादा नहीं किया
परवीन शाकिर द्वारा
ہم نے ہی لوٹنے کا ارادہ نہیں کیا
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यूँ ही हैरान-ओ-ख़फ़ा जूँ ग़ुंचा-ए-तस्वीर हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
یوں ہی حیران و خفا جوں غنچۂ تصویر ہوں
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रात से आँसू मरी आँखों में फिर आने लगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
رات سے آنسو مری آنکھوں میں پھر آنے لگا
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याद उसे इंतिहाई करते हैं
जौन एलिया द्वारा
یاد اسے انتہائی کرتے ہیں
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किस से इज़हार-ए-मुद्दआ कीजे
जौन एलिया द्वारा
کس سے اظہار مدعا کیجے
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बजा इरशाद फ़रमाया गया है
जौन एलिया द्वारा
بجا ارشاد فرمایا گیا ہے
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ये रोज़-ए-हश्र का और शिकवा-ए-वफ़ा के लिये
قمر جلالوی द्वारा
یہ روز حشر کا اور شکوۂ وفا کے لئے
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उन्हें क्यों फूल दुश्मन ईद में पहनाए जाते हैं
قمر جلالوی द्वारा
انہیں کیوں پھول دشمن عید میں پہنائے جاتے ہیں
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क्यों न हम अहद-ए-रफ़ाक़त को भुलाने लग जाएँ
अहमद फ़राज़ द्वारा
کیوں نہ ہم عہد رفاقت کو بھلانے لگ جائیں
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अब क्या सोचें क्या हालात थे किस कारन ये ज़हर पिया है
अहमद फ़राज़ द्वारा
اب کیا سوچیں کیا حالات تھے کس کارن یہ زہر پیا ہے
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नोहा-गरों में दीदा-ए-तर भी उसी का था
अहमद फ़राज़ द्वारा
نوحہ گروں میں دیدۂ تر بھی اسی کا تھا
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परदे में इस बदन के छुपें राज़ किस तरह
Amjad Islam Amjad द्वारा
پردے میں اس بدن کے چھپیں راز کس طرح
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मुए सहते सहते जफ़ा-कारियाँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
موے سہتے سہتے جفا کاریاں
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शिकवा करूँ मैं कब तक उस अपने मेहरबाँ का
मीर तक़ी मीर द्वारा
شکوہ کروں میں کب تک اس اپنے مہرباں کا
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पैंस में गुज़रते हैं जो कूचे से वो मेरे
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
پینس میں گزرتے ہیں جو کوچے سے وہ میرے
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तुम अपने शिकवे की बातें न खोद खोद के पूछो
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
تم اپنے شکوے کی باتیں نہ کھود کھود کے پوچھو
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