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तलवार ग़र्क़-ए-ख़ूँ है आँखें गुलाबियाँ हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
تلوار غرق خوں ہے آنکھیں گلابیاں ہیں
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उन्हें क्यों फूल दुश्मन ईद में पहनाए जाते हैं
قمر جلالوی द्वारा
انہیں کیوں پھول دشمن عید میں پہنائے جاتے ہیں
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तुम में जो बात है वो बात नहीं आई है
قمر جلالوی द्वारा
تم میں جو بات ہے وہ بات نہیں آئی ہے
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दोज़्दीदा निगह करना फिर आँख मिलाना भी
मीर तक़ी मीर द्वारा
دزدیدہ نگہ کرنا پھر آنکھ ملانا بھی
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क्या लड़के दिल्ली के हैं अय्यार और नट खट
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا لڑکے دلی کے ہیں عیار اور نٹ کھٹ
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