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अब के बरस दस्तूर-ए-सितम में क्या क्या बाब ईज़ाद हुए
اب کے برس دستور ستم میں کیا کیا باب ایزاد ہوئے
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बे-दम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते
بے دم ہوئے بیمار دوا کیوں نہیں دیتے
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तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चराग़
تیرے ہوتے ہوئے محفل میں جلاتے ہیں چراغ
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कब तलक ये सितम उठाइयेगा
کب تلک یہ ستم اٹھائیے گا
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छाती जला करे है सोज़-ए-दरूँ बला है
چھاتی جلا کرے ہے سوز دروں بلا ہے
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