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अब के बरस दस्तूर-ए-सितम में क्या क्या बाब ईज़ाद हुए
فیض احمد فیض द्वारा
اب کے برس دستور ستم میں کیا کیا باب ایزاد ہوئے
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बे-दम हुए बीमार दवा क्यों नहीं देते
فیض احمد فیض द्वारा
بے دم ہوئے بیمار دوا کیوں نہیں دیتے
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तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चराग़
अहमद फ़राज़ द्वारा
تیرے ہوتے ہوئے محفل میں جلاتے ہیں چراغ
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कब तलक ये सितम उठाइयेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کب تلک یہ ستم اٹھائیے گا
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छाती जला करे है सोज़-ए-दरूँ बला है
मीर तक़ी मीर द्वारा
چھاتی جلا کرے ہے سوز دروں بلا ہے
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न दिल से आह न लब से सदा निकलती है
अहमद फ़राज़ द्वारा
نہ دل سے آہ نہ لب سے صدا نکلتی ہے
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करते ही नहीं तर्क-ए-बुताँ तौर-ए-जफ़ा का
मीर तक़ी मीर द्वारा
کرتے ہی نہیں ترک بتاں طور جفا کا
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हैं बाद मिरे मर्ग के आसार से अब तक
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہیں بعد مرے مرگ کے آثار سے اب تک
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सितम की रस्में बहुत थीं लेकिन न थी तिरी अंजुमन से पहले
فیض احمد فیض द्वारा
ستم کی رسمیں بہت تھیں لیکن نہ تھی تری انجمن سے پہلے
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ख़ामोश हो क्यों दाद-ए-जफ़ा क्यों नहीं देते
अहमद फ़राज़ द्वारा
خاموش ہو کیوں داد جفا کیوں نہیں دیتے
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गिला फ़ुज़ूल था अहद-ए-वफ़ा के होते हुए
अहमद फ़राज़ द्वारा
گلہ فضول تھا عہد وفا کے ہوتے ہوئے
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हम भी फिरते हैं यक हशम ले कर
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم بھی پھرتے ہیں یک حشم لے کر
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मुस्तौजिब-ए-ज़ुल्म-ओ-सितम-ओ-जौर-ओ-जफ़ा हूँ
मीर तक़ी मीर द्वारा
مستوجب ظلم و ستم و جور و جفا ہوں
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ग़ुरूर-ए-जाँ को मेरे यार बेच देते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
غرور جاں کو مرے یار بیچ دیتے ہیں
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दरबार में अब सतवत-ए-शाही की अलामत
فیض احمد فیض द्वारा
دربار میں اب سطوت شاہی کی علامت
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कहाँ तक ग़ैर जासूसी के लेने को लगा आवे
मीर तक़ी मीर द्वारा
کہاں تک غیر جاسوسی کے لینے کو لگا آوے
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दिल की तरफ़ कुछ आह से दिल का लगाओ है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل کی طرف کچھ آہ سے دل کا لگاؤ ہے
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क्या कहिए कि ख़ूबां ने अब हम में है क्या रखा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہیے کہ خوباں نے اب ہم میں ہے کیا رکھا
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नक़्क़ाश देख तो मैं क्या नक़्श-ए-यार खेंचा
मीर तक़ी मीर द्वारा
نقاش دیکھ تو میں کیا نقش یار کھینچا
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अब्रू तो दिखा दीजिए शमशीर से पहले
قمر جلالوی द्वारा
ابرو تو دکھا دیجئے شمشیر سے پہلے
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