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पाये ख़िताब क्या क्या देखे अताब क्या क्या
پائے خطاب کیا کیا دیکھے عتاب کیا کیا
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अब मीरؔ जी तो अच्छे ज़िंदीक़ ही बन बैठे
اب میرؔ جی تو اچھے زندیق ہی بن بیٹھے
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क्या बुलबुल असीर है बे बाल-ओ-पर कि हम
کیا بلبل اسیر ہے بے بال و پر کہ ہم
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गर्म हैं शोर से तुझ हुस्न के बाज़ार कई
گرم ہیں شور سے تجھ حسن کے بازار کئی
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सितम सिखलाएगा रस्म-ए-वफ़ा ऐसे नहीं होता
ستم سکھلائے گا رسم وفا ایسے نہیں ہوتا
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