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अजब इक तौर है जो हम सितम ईजाद रखें
عجب اک طور ہے جو ہم ستم ایجاد رکھیں
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تجھے ہے مشق ستم کا ملال ویسے ہی
تجھے ہے مشق ستم کا ملال ویسے ہی
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सजदे तेरे कहने से मैं कर लूँ भी तो क्या हो
سجدے ترے کہنے سے میں کر لوں بھی تو کیا ہو
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सब लोग लिए संग-ए-मलामत निकल आए
سب لوگ لیے سنگ ملامت نکل آئے
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हम ने किस रात नाला सर न किया
ہم نے کس رات نالہ سر نہ کیا
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