ग़ज़ल3
अशआर9
نازکی اس کے لب کی کیا کہیے پنکھڑی اک گلاب کی سی ہے
नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए पंखड़ी एक गुलाब की सी है
— मीर तक़ी मीरمیرؔ ان نیم باز آنکھوں میںساری مستی شراب کی سی ہے
मीर उन नीम-बाज़ आँखों मेंसारी मस्ती शराब की सी है
— मीर तक़ी मीरپتا پتا بوٹا بوٹا حال ہمارا جانے ہے جانے نہ جانے گل ہی نہ جانے باغ تو سارا جانے ہے
पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है जाने न जाने गुल ही न जाने बाग़ तो सारा जाने है
— मीर तक़ी मीरعاشق سا تو سادہ کوئی اور نہ ہوگا دنیا میں جی کے زیاں کو عشق میں اس کے اپنا وارا جانے ہے
आशिक़ सा तो सादा कोई और न होगा दुनिया में जी के ज़ियां को इश्क़ में उस के अपना वारा जाने है
— मीर तक़ी मीर