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नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तजू ही सही
فیض احمد فیض द्वारा
نہیں نگاہ میں منزل تو جستجو ہی سہی
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वो तफ़ावुतें हैं मरे ख़ुदा कि ये तो नहीं कोई और है
अहमद फ़राज़ द्वारा
وہ تفاوتیں ہیں مرے خدا کہ یہ تو نہیں کوئی اور ہے
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आप की याद आती रही रात भर
فیض احمد فیض द्वारा
آپ کی یاد آتی رہی رات بھر
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वह अहद-ए-ग़म की काहिश-हाए-बे-हासिल को क्या समझें
فیض احمد فیض द्वारा
وہ عہد غم کی کاہش ہائے بے حاصل کو کیا سمجھے
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रफ़ाक़तों में पशेमानियाँ तो होती हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
رفاقتوں میں پشیمانیاں تو ہوتی ہیں
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जमेगी कैसे बिसात-ए-यारां कि शीशा-ओ-जाम बुझ गए हैं
فیض احمد فیض द्वारा
جمے گی کیسے بساط یاراں کہ شیشہ و جام بجھ گئے ہیں
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ढूंढा न पाईए जो इस वक़्त में सो ज़र है
मीर तक़ी मीर द्वारा
ڈھونڈا نہ پائیے جو اس وقت میں سو زر ہے
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आलम में कोई दिल का तलबगार न पाया
मीर तक़ी मीर द्वारा
عالم میں کوئی دل کا طلب گار نہ پایا
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कुछ मुहतसिबों की ख़लवत में कुछ वाइज़ के घर जाती है
فیض احمد فیض द्वारा
کچھ محتسبوں کی خلوت میں کچھ واعظ کے گھر جاتی ہے
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अर्ज़-ए-ग़म कभी उस के रू-ब-रू भी हो जाए
अहमद फ़राज़ द्वारा
عرض غم کبھی اس کے روبرو بھی ہو جائے
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आ जाएँ हम नज़र जो कोई दम बहुत है यां
मीर तक़ी मीर द्वारा
آ جائیں ہم نظر جو کوئی دم بہت ہے یاں
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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
मीर तक़ी मीर द्वारा
الٹی ہو گئیں سب تدبیریں کچھ نہ دوا نے کام کیا
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किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आशना नहीं
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
کس کو سناؤں حال غم کوئی غم آشنا نہیں
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कभी जब मुद्दतों के बाद उस का सामना होगा
जौन एलिया द्वारा
کبھی جب مدتوں کے بعد اس کا سامنا ہوگا
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हम आँधियों के बन में किसी कारवाँ के थे
जौन एलिया द्वारा
ہم آندھیوں کے بن میں کسی کارواں کے تھے
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हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई
فیض احمد فیض द्वारा
ہم سادہ ہی ایسے تھے کی یوں ہی پذیرائی
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अब जो कोई पूछे भी तो इससे क्या शर्ह-ए-हालात करें
فیض احمد فیض द्वारा
اب جو کوئی پوچھے بھی تو اس سے کیا شرح حالات کریں
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अब और क्या किसी से मरासिम बढ़ाएं हम
अहमद फ़राज़ द्वारा
اب اور کیا کسی سے مراسم بڑھائیں ہم
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कुछ पहले इन आँखों आगे क्या क्या न नज़ारा गुज़रे था
فیض احمد فیض द्वारा
کچھ پہلے ان آنکھوں آگے کیا کیا نہ نظارا گزرے تھا
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क़ुर्ब-ए-जानां का न मयख़ाने का मौसम आया
अहमद फ़राज़ द्वारा
قرب جاناں کا نہ مے خانے کا موسم آیا
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