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बैठे थे लोग पहलू ब पहलू पिए हुए
بیٹھے تھے لوگ پہلو بہ پہلو پیے ہوئے
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था अबस तर्क-ए-ताल्लुक़ का इरादा यूँ भी
تھا عبث ترک تعلق کا ارادہ یوں بھی
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सकूत-ए-शाम-ए-ख़िज़ां है क़रीब आ जाओ
سکوت شام خزاں ہے قریب آ جاؤ
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दुआ का टूटा हुआ हर्फ़ सर्द आह में है
دعا کا ٹوٹا ہوا حرف سرد آہ میں ہے
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तेरी ख़ुशबू का पता करती है
تیری خوشبو کا پتا کرتی ہے
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