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तन्हाई

सभी 169अशआर 0ग़ज़ल 169
ग़ज़ल169
बैठे थे लोग पहलू ब पहलू पिए हुए
بیٹھے تھے لوگ پہلو بہ پہلو پیے ہوئے
था अबस तर्क-ए-ताल्लुक़ का इरादा यूँ भी
تھا عبث ترک تعلق کا ارادہ یوں بھی
सकूत-ए-शाम-ए-ख़िज़ां है क़रीब आ जाओ
سکوت شام خزاں ہے قریب آ جاؤ
दुआ का टूटा हुआ हर्फ़ सर्द आह में है
دعا کا ٹوٹا ہوا حرف سرد آہ میں ہے
तेरी ख़ुशबू का पता करती है
تیری خوشبو کا پتا کرتی ہے
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