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तसव्वुफ़

सभी 22अशआर 0ग़ज़ल 22
ग़ज़ल22
था मुस्तआर हुस्न से उस के जो नूर था
تھا مستعار حسن سے اس کے جو نور تھا
है वजह कोई ख़ास मेरी आँख जो नम है
ہے وجہ کوئی خاص مری آنکھ جو نم ہے
हम आप ही को अपना मक़सूद जानते हैं
ہم آپ ہی کو اپنا مقصود جانتے ہیں
आए हैं मीर काफ़िर हो कर ख़ुदा के घर में
آئے ہیں میرؔ کافر ہو کر خدا کے گھر میں
कमाल-ए-हुस्न है हुस्न-ए-कमाल से बाहर
کمال حسن ہے حسن کمال سے باہر
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