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था मुस्तआर हुस्न से उस के जो नूर था
मीर तक़ी मीर द्वारा
تھا مستعار حسن سے اس کے جو نور تھا
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है वजह कोई ख़ास मेरी आँख जो नम है
फ़ना बुलंदशहरी द्वारा
ہے وجہ کوئی خاص مری آنکھ جو نم ہے
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हम आप ही को अपना मक़सूद जानते हैं
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم آپ ہی کو اپنا مقصود جانتے ہیں
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आए हैं मीर काफ़िर हो कर ख़ुदा के घर में
मीर तक़ी मीर द्वारा
آئے ہیں میرؔ کافر ہو کر خدا کے گھر میں
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कमाल-ए-हुस्न है हुस्न-ए-कमाल से बाहर
Amjad Islam Amjad द्वारा
کمال حسن ہے حسن کمال سے باہر
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सहर-गह-ए-ईद में दौर-ए-सबू था
मीर तक़ी मीर द्वारा
سحر گہہ عید میں دور سبو تھا
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मिलाऊँ किस की आँखों से मैं अपनी चश्म-ए-हैरां को
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
ملاؤں کس کی آنکھوں سے میں اپنی چشم حیراں کو
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हम तुझ से किस हवस की फ़लक जुस्तुजू करें
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
ہم تجھ سے کس ہوس کی فلک جستجو کریں
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करते ही नहीं तर्क-ए-बुताँ तौर-ए-जफ़ा का
मीर तक़ी मीर द्वारा
کرتے ہی نہیں ترک بتاں طور جفا کا
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समझना फ़हम गर कुछ है तबीई से इलाही को
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
سمجھنا فہم گر کچھ ہے طبیعی سے الٰہی کو
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बाग़-ए-जहां के गुल हैं या ख़ार हैं तो हम हैं
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
باغ جہاں کے گل ہیں یا خار ہیں تو ہم ہیں
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सब क़रीने इसी दिल दार के रख देते हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
سب قرینے اسی دل دار کے رکھ دیتے ہیں
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अर्ज़-ओ-समा कहाँ तेरी वुसअत को पा सके
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
ارض و سما کہاں تری وسعت کو پا سکے
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मुझ सोज़ बाद-ए-मर्ग से आगाह कौन है
मीर तक़ी मीर द्वारा
مجھ سوز بعد مرگ سے آگاہ کون ہے
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तुझी को जो याँ जल्वा फ़रमा न देखा
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
تجھی کو جو یاں جلوہ فرما نہ دیکھا
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मुझे दर से अपने तो टाले है यह बता मुझे तू कहाँ नहीं
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
مجھے در سے اپنے تو ٹالے ہے یہ بتا مجھے تو کہاں نہیں
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रब्त है नाज़-ए-बुताँ को तो मिरी जान के साथ
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
ربط ہے ناز بتاں کو تو مری جان کے ساتھ
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मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था
ख़्वाजा मीर दर्द द्वारा
مدرسہ یا دیر تھا یا کعبہ یا بت خانہ تھا
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आमद-ए-सैलाब-ए-तूफ़ान सदा-ए-आब है
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
آمد سیلاب طوفان صداۓ آب ہے
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कब से नज़र लगी थी दरवाज़-ए-हरम से
मीर तक़ी मीर द्वारा
کب سے نظر لگی تھی دروازۂ حرم سے
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