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कितनी सरकश भी हो सरफिरी यह हवा रखना रोशन दिया
کتنی سرکش بھی ہو سرپھری یہ ہوا رکھنا روشن دیا
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बख़्त से कोई शिकायत है न अफ़लाक से है
بخت سے کوئی شکایت ہے نہ افلاک سے ہے
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मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से
مشکل ہے کہ اب شہر میں نکلے کوئی گھر سے
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सब्ज़ मौसम की ख़बर ले के हवा आई हो
سبز موسم کی خبر لے کے ہوا آئی ہو
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ऐ मेरे हम-नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं
اے مرے ہم نشیں چل کہیں اور چل اس چمن میں اب اپنا گزارہ نہیں
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