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उम्मीद

सभी 13अशआर 0ग़ज़ल 13
ग़ज़ल13
कितनी सरकश भी हो सरफिरी यह हवा रखना रोशन दिया
کتنی سرکش بھی ہو سرپھری یہ ہوا رکھنا روشن دیا
बख़्त से कोई शिकायत है न अफ़लाक से है
بخت سے کوئی شکایت ہے نہ افلاک سے ہے
मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से
مشکل ہے کہ اب شہر میں نکلے کوئی گھر سے
सब्ज़ मौसम की ख़बर ले के हवा आई हो
سبز موسم کی خبر لے کے ہوا آئی ہو
ऐ मेरे हम-नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं
اے مرے ہم نشیں چل کہیں اور چل اس چمن میں اب اپنا گزارہ نہیں
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