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कितनी सरकश भी हो सरफिरी यह हवा रखना रोशन दिया
Amjad Islam Amjad द्वारा
کتنی سرکش بھی ہو سرپھری یہ ہوا رکھنا روشن دیا
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बख़्त से कोई शिकायत है न अफ़लाक से है
परवीन शाकिर द्वारा
بخت سے کوئی شکایت ہے نہ افلاک سے ہے
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मुश्किल है कि अब शहर में निकले कोई घर से
परवीन शाकिर द्वारा
مشکل ہے کہ اب شہر میں نکلے کوئی گھر سے
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सब्ज़ मौसम की ख़बर ले के हवा आई हो
परवीन शाकिर द्वारा
سبز موسم کی خبر لے کے ہوا آئی ہو
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ऐ मेरे हम-नशीं चल कहीं और चल इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं
قمر جلالوی द्वारा
اے مرے ہم نشیں چل کہیں اور چل اس چمن میں اب اپنا گزارہ نہیں
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हवाएँ लाख चलें लौ सँभलती रहती है
Amjad Islam Amjad द्वारा
ہوائیں لاکھ چلیں لو سنبھلتی رہتی ہے
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शाम ढले जब बस्ती वाले लौट के घर को आते हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
شام ڈھلے جب بستی والے لوٹ کے گھر کو آتے ہیں
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हर्फ़ ताज़ा नई ख़ुशबू में लिखा चाहता है
परवीन शाकिर द्वारा
حرف تازہ نئی خوشبو میں لکھا چاہتا ہے
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हवा-ए-ताज़ा में फिर जिस्म-ओ-जाँ बसाने का
परवीन शाकिर द्वारा
ہوائے تازہ میں پھر جسم و جاں بسانے کا
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कुछ ख़बर लाई तो है बाद बहारी उस की
परवीन शाकिर द्वारा
کچھ خبر لائی تو ہے باد بہاری اس کی
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क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला
परवीन शाकिर द्वारा
کیا کرے میری مسیحائی بھی کرنے والا
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खेल उस ने दिखा के जादू के
Amjad Islam Amjad द्वारा
کھیل اس نے دکھا کے جادو کے
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क्या करे मेरी मसीहाई भी करने वाला
परवीन शाकिर द्वारा
کیا کرے میری مسیحائی بھی کرنے والا
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