Yaad Ayyam Ke Yaan Tark-e-Shakeebai Tha
یاد ایام کہ یاں ترک شکیبائی تھا
याद अय्याम कि याँ तर्क-ए-शकेबाई था
ग़ज़ल
१ मिनट पढ़ने मेंیاد ایام کہ یاں ترک شکیبائی تھا
ہر گلی شہر کی یاں کوچۂ رسوائی تھا
Yaad ayyam ke yaan tark-e-shakeebai tha
Har gali sheher ki yaan koocha-e-ruswai tha
याद अय्याम कि याँ तर्क-ए-शकेबाई था
हर गली शहर की याँ कूचा-ए-रुसवाई था
اتنی گزری جو ترے ہجر میں سو اس کے سبب
صبر مرحوم عجب مونس تنہائی تھا
Itni guzri jo tere hijr mein so us ke sabab
Sabr marhoom ajab moonis-e-tanhai tha
इतनी गुज़री जो तिरे हिज्र में सो उस के सबब
सब्र मरहूम अजब मूनिस-ए-तन्हाई था

मीर तक़ी मीर1723–1810
शास्त्रीय
मीर ताक़ी 'मीर' उर्दू के महानतम क्लासिक शायर हैं, जिन्हें 'ख़ुदा-ए-सुख़न' (शायरी का ईश्वर) कहा जाता है। उन्होंने जीवन के दुखों को बेहद सरल भाषा में ढालकर उर्दू ग़ज़ल को अमर बना दिया।
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