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अपनी ही आवाज़ को बे-शक़ कान में रखना
अहमद फ़राज़ द्वारा
اپنی ہی آواز کو بے شک کان میں رکھنا
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कभी कहा न किसी से तेरे फ़साने को
قمر جلالوی द्वारा
کبھی کہا نہ کسی سے ترے فسانے کو
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हम ने जाना था सुख़न होंगे ज़बाँ पर कितने
मीर तक़ी मीर द्वारा
ہم نے جانا تھا سخن ہوں گے زباں پر کتنے
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रही न पुख़्तगी आलम में दौर-ए-ख़ामी है
मीर तक़ी मीर द्वारा
رہی نہ پختگی عالم میں دور خامی ہے
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फ़क़ीह-ए-शहर की मजलिस से कुछ भला न हुआ
अहमद फ़राज़ द्वारा
فقیہ شہر کی مجلس سے کچھ بھلا نہ ہوا
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उस को जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ
अहमद फ़राज़ द्वारा
اس کو جدا ہوئے بھی زمانہ بہت ہوا
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जैसे मैं देखता हूँ लोग नहीं देखते हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
جیسے میں دیکھتا ہوں لوگ نہیں دیکھتے ہیں
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सभी गुनाह धुल गए सज़ा ही और हो गई
परवीन शाकिर द्वारा
سبھی گناہ دھل گئے سزا ہی اور ہو گئی
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लहू में रंग लहराने लगे हैं
Amjad Islam Amjad द्वारा
لہو میں رنگ لہرانے لگے ہیں
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