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दिल जो ज़ेर-ए-ग़ुबार अक्सर था
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل جو زیر غبار اکثر تھا
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राह-ए-दूर-ए-इश्क़ में रोता है क्या
मीर तक़ी मीर द्वारा
راہ دور عشق میں روتا ہے کیا
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रफ़ाक़तों में पशेमानियाँ तो होती हैं
अहमद फ़राज़ द्वारा
رفاقتوں میں پشیمانیاں تو ہوتی ہیں
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देख तो दिल के जाँ से उठता है
मीर तक़ी मीर द्वारा
دیکھ تو دل کہ جاں سے اٹھتا ہے
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फ़क़ीराना आए सदा कर चले
मीर तक़ी मीर द्वारा
فقیرانہ آئے صدا کر چلے
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ज़िंदगी से यही गिला है मुझे
अहमद फ़राज़ द्वारा
زندگی سے یہی گلہ ہے مجھے
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समझ में ज़िंदगी आए कहाँ से
जौन एलिया द्वारा
سمجھ میں زندگی آئے کہاں سے
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इश्क़ ऐसा अजीब दरिया है
Amjad Islam Amjad द्वारा
عشق ایسا عجیب دریا ہے
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ज़िंदगी दर्द भी दवा भी थी
Amjad Islam Amjad द्वारा
زندگی درد بھی دوا بھی تھی
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दिल-ओ-दिमाग़ है अब किस को ज़िंदगानी का
मीर तक़ी मीर द्वारा
دل و دماغ ہے اب کس کو زندگانی کا
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ये जो हासिल हमें हर शय की फ़रावानी है
Amjad Islam Amjad द्वारा
یہ جو حاصل ہمیں ہر شے کی فراوانی ہے
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तारा तारा उतर रही है रात समंदर में
Amjad Islam Amjad द्वारा
تارا تارا اتر رہی ہے رات سمندر میں
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क्या कहिए क्या रखें हैं हम तुझ से यार ख़्वाहिश
मीर तक़ी मीर द्वारा
کیا کہیے کیا رکھیں ہیں ہم تجھ سے یار خواہش
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कब तक तू इम्तिहाँ में मुझ से जुदा रहेगा
मीर तक़ी मीर द्वारा
کب تک تو امتحاں میں مجھ سے جدا رہے گا
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जो दिन था एक मुसीबत तो रात भारी थी
Amjad Islam Amjad द्वारा
جو دن تھا ایک مصیبت تو رات بھاری تھی
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ग़ुबार-ए-दश्त-ए-तलब में हैं रफ़्तगाँ क्या क्या
Amjad Islam Amjad द्वारा
غبار دشت طلب میں ہیں رفتگاں کیا کیا
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हवाएँ लाख चलें लौ सँभलती रहती है
Amjad Islam Amjad द्वारा
ہوائیں لاکھ چلیں لو سنبھلتی رہتی ہے
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दूरियाँ सिमटने में देर कुछ तो लगती है
Amjad Islam Amjad द्वारा
دوریاں سمٹنے میں دیر کچھ تو لگتی ہے
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निकल के हल्क़ा-ए-शाम-ओ-सहर से जाएँ कहीं
Amjad Islam Amjad द्वारा
نکل کے حلقۂ شام و سحر سے جائیں کہیں
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जो न नक़्द-ए-दाग़-ए-दिल की करे शोला पासबानी
मिर्ज़ा ग़ालिब द्वारा
جو نہ نقد داغ دل کی کرے شعلہ پاسبانی
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